क्राइम

घुघरा में तेंदुएं की संदिग्ध मौत, गोयनका के फार्म हाउस में फिर उठा शिकार का साया ?

वन विभाग मौन ?

 

वन विभाग के अमले में उस समय हड़कंप मच गया जब बीती रात्रि 24 सितंबर को मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर सिहोरा वन परिक्षेत्र की टीम ने सरदा बीट के पीएफ 47 से लगभग एक किलोमीटर दूर ग्राम घुघरा स्थित निसर्ग इस्पात प्राइवेट लिमिटेड के परिसर में एक तेंदुए का शव बरामद किया।

यह वही स्थान है जहाँ कुछ माह पूर्व तीन जंगली सूअरों के शिकार और उन्हें दफनाने का मामला सामने आया था। उस समय वन विभाग ने दबिश देकर कंपनी के मैनेजर सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। अब दोबारा तेंदुए का शव मिलने से क्षेत्र में सनसनी फैल गई है।

फैंसिंग टूटी, झाड़ियों में मिला शव

निरीक्षण के दौरान वन विभाग की टीम को कंपनी के पीछे की फैंसिंग टूटी हुई मिली। अंदर प्रवेश करने पर लगभग कुछ दूरी पर साजा वृक्ष के नीचे झाड़ियों में मृत तेंदुआ पाया गया। टीम ने रात 12:30 बजे मौके की घेराबंदी कर शव को सुरक्षित किया और जांच प्रारंभ की।

डीएफओ मौके पर, डॉग स्क्वाड का इंतजार

घटना की जानकारी मिलते ही डीएफओ ऋषि मिश्र, रेंजर आकाशपुरी गोस्वामी, और एसडीओ एम.एल. बरकडे सहित वन विभाग का अमला मौके पर पहुँच गया। अधिकारियों ने बताया कि डॉग स्क्वाड को बुलाया गया है, जिसके आने के बाद शव का पोस्टमार्टम कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल जांच जारी है।

250 एकड़ का निसर्ग इस्पात परिसर, कार्रवाई पर उठे सवाल

हरगढ़ के पास स्थित लगभग 250 एकड़ क्षेत्रफल में फैला निसर्ग इस्पात प्राइवेट लिमिटेड पहले भी शिकार मामलों को लेकर सुर्खियों में रह चुका है। जंगली सूअर शिकार प्रकरण में जहाँ मैनेजर और दो कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई, वहीं कंपनी के निदेशक महेन्द्र कुमार गोयनका और अंशुमान गुप्ता के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

स्थानीय लोगों में चर्चा है कि जब शिकार की घटनाएँ बार-बार एक ही परिसर में हो रही हैं, तो केवल कर्मचारियों पर ही कार्रवाई क्यों सीमित रखी गई?

कंपनी दिल्ली स्थित, निदेशक पर निगाहें

गूगल से प्राप्त जानकारी के अनुसार, निसर्ग इस्पात प्राइवेट लिमिटेड दिल्ली स्थित कंपनी है, जिसके निदेशक महेन्द्र कुमार गोयनका और अंशुमान गुप्ता हैं। कंपनी माइनिंग और इस्पात कारोबार से जुड़ी हुई है।

वन विभाग के उच्च अधिकारियों का कहना है कि कार्यवाही जारी है, किंतु आधिकारिक पुष्टि के बिना कुछ भी स्पष्ट नहीं कहा जा सकता।

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