कटनी –शासकीय कन्या महाविद्यालय, कटनी में गीता जयंती के अवसर पर प्राचार्य डॉ. चित्रा प्रभात के मार्गदर्शन एवं कार्यक्रम प्रभारी डॉ. विमला मिंज के संयोजन में कार्यक्रम का आयोजन किया गया
शासकीय कन्या महाविद्यालय में गीता जयंती पर कार्यक्रम आयोजित

शासकीय कन्या महाविद्यालय में गीता जयंती पर कार्यक्रम आयोजित
कटनी –शासकीय कन्या महाविद्यालय, कटनी में गीता जयंती के अवसर पर प्राचार्य डॉ. चित्रा प्रभात के मार्गदर्शन एवं कार्यक्रम प्रभारी डॉ. विमला मिंज के संयोजन में कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में प्राचार्य डॉ. चित्रा प्रभात ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में छात्राओं को कर्मयोग के महत्व पर प्रकाश डालते हुये कहा कि भगवद्गीता में श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र के युद्धक्षेत्र में अर्जुन को जो अमर उपदेश दिए, वे आज भी विपरीत परिस्थितियों में मनुष्य को संबल प्रदान करते हैं। निष्काम कर्म, धैर्य, संयम और आत्मसंयम ही जीवन का सच्चा सार है।
कार्यक्रम संयोजक डॉ. विमला मिंज ने भगवद्गीता के 15वें अध्याय ‘पुरुषोत्तम योग’ की गहन व्याख्या की। उन्होंने बताया कि इस अध्याय में संसार को एक उल्टे पीपल के वृक्ष के रूप में दर्शाया गया है, जिसकी जड़ें ऊपर और शाखाएँ नीचे की ओर हैं। संसार की आसक्ति ही बंधन का कारण है तथा भगवान ही पुरुषोत्तम हैं।
गीता जयंती के उपलक्ष्य में महाविद्यालय में ऑनलाइन प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का भी आयोजन किया जा रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में छात्राओं ने ऑनलाईन पंजीयन कराया है।
इस अवसर पर वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. साधना जैन, डॉ. रश्मि चतुर्वेदी, के.जे. सिन्हा, डॉ. वीणा सिंह, डॉ. सुनील कुमार, डॉ. अमिताभ पाण्डेय, बंदना मिश्रा, डॉ. रोशनी पाण्डेय, श्री विनेश यादव, सुश्री मिथलेश्वरी, शिल्पी कुमारी सिंह, नागेंद्र यादव, पंकज सेन, डॉ. अशुतोष द्विवेदी, डॉ. अनिल द्विवेदी, डॉ. अपर्णा मिश्रा, डॉ. रीना मिश्रा, डॉ. अशोक शर्मा, भीम बर्मन, प्रेमलाल कोल, डॉ. फूलचंद कोरी, प्रियंका सोनी, स्मृति दहायत, सृष्टि श्रीवास्तव, आंजनेय तिवारी, विनीत सोनी, नम्रता निगम, डॉ. सोनिया कश्यप, आरती वर्मा, रिचा दुबे, श्वेता कोरी, देववती चक्रवर्ती, डॉ. मैत्रयी शुक्ला, डॉ. प्रतिमा सिंह, रत्नेश कुशवाहा, डॉ. वंदना चौहान, पूनम गर्ग, डॉ. मदन सिंह मरावी, मीनाक्षी वर्मा, इमरान मोहम्मद, पूजा सिंह राजपूत, सुषमा वर्मा सहित महाविद्यालय के समस्त शिक्षक एवं छात्राएँ उपस्थित रहीं।




