दुनिया

नारी तेरी यही कहानी

 

नारी तेरी यही कहानी 

 

पढ़ाई का था शौक, कुछ बनने की थी तमन्ना, मगर हालात से टूटा अरमानों का सहारा बन गया 

 

शिकवा किया ना शिकायत किया जो चाहा था पाना, वही दर्द का पैमाना बन गया। 

 

पति भी मिला ऐसा, तकदीर ने आंसू लिखें, हर मुस्कान अब दर्द का बहाना बन गया।

 

वो बोली में बीमार नहीं बस डरती हूं, 

हर ख्वाब उसका ताना बन गया। 

 

लोगों को इल्जामों को उसने मंजूर कर लिया, चुप रहना भी अब बयान बन गया। 

 

ना आवाज उठाया ना शिकायत किया, जो सपना था उसका वही जमाने का तराना बन गया। 

 

लोगों के इल्जामों को उसने मंजूर कर लिया, हर आंसू उसकी मुस्कान हर दर्द उसकी दवा बन गया। 

 

जिंदगी की किताब में हर दर्द उसका एक अध्याय, हर आंसू उसका एक इम्तिहान बन गया।

 

सबीहा कौसर सीमा♦

मुम्बई महाराष्ट्र

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