शासकीय तिलक स्नातकोत्तर महाविद्यालय में बाल संरक्षण पर संगोष्ठी आयोजित

शासकीय तिलक स्नातकोत्तर महाविद्यालय में बाल संरक्षण पर संगोष्ठी आयोजित
विद्यार्थियों को बाल संरक्षण की आवश्यकता और बाल संरक्षण से संबंधित कानूनों की दी जानकारी
कटनी – प्रधानमंत्री कॉलेज आफ एक्सीलेंस शासकीय तिलक स्नातकोत्तर महाविद्यालय कटनी में बुधवार को प्राचार्य डॉ. सुनील कुमार बाजपेई की अध्यक्षता और कार्यक्रम अधिकारी डॉ. माधुरी गर्ग के निर्देशन में बाल संरक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत संगोष्ठी कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में प्राचार्य डॉ. बाजपेई ने विद्यार्थियों को बताया कि मानव जीवन अत्यंत अमूल्य है। बचपन या बाल्यावस्था जीवन का स्वर्णिम काल है। यह उम्र अपने भविष्य को सवारने व जिंदगी को विभिन्न प्रकार से स्वस्थ रखने हेतु होती है। इस काल में शिक्षा ग्रहण कर हम अपने जीवन के समस्त पहलुओं को सुधार सकते हैं, इसलिए युवाओं का विशेष कर्तव्य है कि गरीबी और अशिक्षा के कारण हम आर्थिक रूप से अशक्त होने पर छोटे-छोटे कार्यों में संलग्न हो जाते हैं और परिवार का पालन करने के लिए तत्पर रहते हैं। हमें इन कार्यों से अपने बच्चों को बचाना है। उनका बचपन बचाना है। उनका जीवन बचाना है।
इसी क्रम में डॉ. माधुरी गर्ग ने बताया कि शासन विभिन्न योजनाओं के तहत विद्यार्थियों के बाल्यावस्था को सुधारने का भरसक प्रयास कर रहा है। उन्होंने पॉक्सो एक्ट व बाल अपराध को रोकने पर अपने विचारों को व्यक्त किया। साथ ही गुड टच-बैड टच के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बाल अपराध से जुड़े हुए विभिन्न योजनाओं और कानून के बारे में बताया। जबकि डीआर नाहिद सिद्दीकी ने बाल संरक्षण का अर्थ बताते हुए कहा कि बच्चों को हिंसा दुर्व्यवहार शोषण और अपेक्षा जैसे खतरों से बचाने के साथ ही उन्हें सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण प्रदान करना है। जिससे बच्चों का शारीरिक मानसिक और भावनात्मक विकास हो सके। वहीं डीआर आरपी सिंह ने कहा कि भारत में बच्चों की सुरक्षा के लिए कई अधिनियम है। जिनमें किशोर न्याय अधिनियम 2015 और यौन अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 प्रमुख है। एकीकृत बाल संरक्षण योजना 2009 में प्रारंभ हुई थी और इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित वातावरण प्रदान करना है।
विद्यार्थियों ने भी इस अवसर पर अपने विचारों को रखते हुये कहा कि हम सभी की जिम्मेदारी बनती है कि हम अपने आसपास होटल, दुकानों आदि में कार्य करने वाले छोटे बच्चों को इन कार्यों से रोकें और उन्हें शासन के द्वारा प्रदत्त सुविधाओं का ज्ञान कराएं। जिससे वह पढ़-लिख करके अपने भविष्य का निर्माण कर सके। अंत में डॉ. माधुरी गर्ग ने सभी का आभार व्यक्त किया।




