मैंने बहुत करीब से ईश्वर को देखा

मैंने बहुत करीब से ईश्वर को देखा
ईश्वर को किसी ने प्रत्यक्ष रूप से नहीं देखा लेकिन जब जीवन सबसे कठिन मोड़ पर खड़ा होता है तब उसकी उपस्थिति को महसूस किया जा सकता है। शास्त्रों और वेदों में ईश्वर की व्याख्या मिलती है पर वास्तविक जीवन में ईश्वर वही होता है जो बुरे समय में बिना किसी स्वार्थ के साथ खड़ा हो जाए। ईश्वर स्वयं धरती पर नहीं आते उन्होंने इसके लिए मनुष्य को माध्यम बनाया है। जब कोई संकट में होता है तब वह किसी न किसी इंसान को अपनी जगह भेज देते हैं। मेरे जीवन में भी ऐसा ही एक समय आया जब मैंने ईश्वर को बहुत करीब से देखा।वह समय अत्यंत पीड़ादायक था। मेरा बेटा जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहा था। हर पल डर असहायता और अनिश्चितता से भरा हुआ था। उस वक्त न पैसा मायने रखता था न पहचान और न ही कोई ओहदा बस एक ही प्रार्थना थी कि किसी तरह बेटा बच जाए। ऐसे कठिन समय में तीन ऐसे लोग सामने आए जिन्होंने बिना किसी हिचक के कहा कि पैसों की परवाह मत करो बस बच्चे की जान बचनी चाहिए। उन तीन लोगों में प्रमुख रूप से विजयराघवगढ़ विधायक श्री संजय सत्येंद्र पाठक जी, बाबू ग्रोवर जी और नवाब खान जी शामिल थे।आज मेरा बेटा भोलेनाथ की कृपा से पूर्णतः स्वस्थ है। यह केवल इलाज नहीं था बल्कि जीवनदान था। इस जीवनदान का ऋण मैं जीवन भर नहीं उतार सकता। विशेष रूप से विधायक संजय सत्येंद्र पाठक जी की भूमिका मेरे लिए अविस्मरणीय है। वह प्रतिदिन फोन कर मेरे बेटे की स्थिति की जानकारी लेते थे, उचित चिकित्सकीय मार्गदर्शन देते थे और यह सुनिश्चित करते थे कि उपचार में किसी प्रकार की कमी न रहे। यहां तक कि एक निजी अस्पताल के संचालक तक को मेरे बेटे के इलाज के लिए स्वयं प्रेरित कर दिया। उस समय ऐसी व्यवस्थाएं देखकर यह महसूस होने लगा कि जैसे हम कोई विशेष व्यक्ति हों जबकि सच्चाई यह है कि संजय सत्येंद्र पाठक जी का सेवक होना ही किसी बड़े पद से कम नहीं होता। यह कोई काल्पनिक कहानी नहीं बल्कि एक कड़वी सच्चाई के बीच उभरी उम्मीद की सच्ची मिसाल है। मेरी तरह केवल हजारों नहीं बल्कि लाखों लोग हैं जो संजय सत्येंद्र पाठक जी के करुणामय संवेदनशील और मानवीय स्वभाव के कारण आज अपने परिवार की खुशियां जी पा रहे हैं। उनके खिलाफ कोई कुछ भी कहे या विरोध करे उससे न हमें फर्क पड़ता है और न ही इस क्षेत्र को क्योंकि बुरे वक्त में जब कोई साथ नहीं देता तब संजय सत्येंद्र पाठक जी ही आगे बढ़कर हाथ थामते हैं।वह वोट की राजनीति नहीं करते बल्कि इंसानियत की राजनीति करते हैं। आम लोगों उनके लिए कड़वे शब्द सहते हैं आलोचनाएं करते है और संजय सत्येंद्र पाठक हमारे लिए सब कुछ झेलते हैं और न जाने कितनी बुराइयों का सामना करते हैं। जो लोग रुतबे, दबाव या ब्लैकमेलिंग के सहारे कुछ हासिल करना चाहते हैं उन्हें यह समझना चाहिए कि मदद कभी डर से नहीं बल्कि विश्वास और प्रेम से की जाती है। देने वाला चाहे कितना भी उदार क्यों न हो वह कभी ब्लैकमेलिंग के आगे नहीं झुकता। मेरे लिए और मेरे जैसे असंख्य परिवारों के लिए संजय सत्येंद्र पाठक जी केवल एक जनप्रतिनिधि नहीं बल्कि ईश्वर के भेजे हुए ऐसे प्रधान सेवक हैं जो टूटते इंसान को फिर से जीने का साहस देते हैं। जिसने मेरे बेटे की सांसों की कीमत समझी उसका एहसान केवल मैं ही नहीं मेरी आने वाली पीढ़ियां भी हमेशा याद रखेंगी। यही कारण है कि आज भी पूरे विश्वास के साथ कहा जा सकता है मैंने ईश्वर को बहुत करीब से देखा है।
शेरा मिश्रा पत्रकार विजयराघवगढ़ 9893793302


