साहित्य रचना
शौक़ को ज़िंदा रखें जीवन में ख़ुशियाँ लाये।

शौक़ को ज़िंदा रखें जीवन में ख़ुशियाँ लाये ।
गजल
इज़हारे इश्क का हम असर देख रहे हैं
उनको नज़र से अपनी नज़र देख रहे हैं
कह कर गए थे लौट के तुम जल्द आओगे
हम राह तेरा आठों पहर देख रहे हैं
अब रात भी है देखिए दम तोड़ने लगे
सूरज निकलने का असर देख रहे हैं
मेरी निगाहें आप की नजरो पे टिकी हैं
और आप हैं की गैर दीगर देख रहे हैं
शौक को ज़िंदा रखे जीवन में ख़ुशियाँ लाये शबनम
हम अपना दर्द ए जख्मी जिगर देख रहे हैं
शबनम मेहरोत्रा



