साहित्य रचना

शीर्षक ,,,,शौक को जिंदा रखे , जीवन में खुशियां भरे।

शीर्षक ,,,,शौक को जिंदा रखे , जीवन में खुशियां भरे।

उम्र छोटा या बड़ा नही लगता 

शौक बताती है तु कितना बड़ा है 

हर समस्या को हंसते हुए झेला है

आज 75 की डेहरी पर खड़ा है

कहते हैं हमसे कि डरना नही 

हल करना तुम्हीं को है

चाहे हंसकर करो या रोकर करो

जिसने अपना काम शौक से किया वहीं तो महान् बना है 

जिंदा हो तो शौक अच्छा पालो

जिंदा होने का सबूत बता दो 

कहते हैं जिंदगी जिंदा दिलों का नाम है 

सुबह-सुबह टहलने निकलो

आते-जाते लोगों से मिलो

उनका दुःख सुख बांट लो

अपने जन्म दिन में बुला लो

या‌ फिर साथ साथ कहीं भी मना लो

बच्चों को बुढ़ो के साथ बुढ़ो को बच्चों के साथ हर तीज त्यौहार मना लो

जहां भी खुशी दिखे जल्दी से चुरा लो 

अपनी बुझी बुझी चेहरा में

मुस्कराहट भर लो 

मंदिर जाकर भगवान से मिलो

न जाओ तो दिल ही दिल मे खिलो

समय निकाल कर प्रकृति से भी मिलो 

चहचहाते पक्षियों से मिलो 

कभी नदी के किनारे कभी समन्दर से मिलो 

झरते झरने के पास जाओ

संग संग उसके गुनगुनाओ

कभी न गाया हो फिर भी गाओ

भोजन भी संतुलित और पौष्टिक 

खाओ और सबको खिलाओ

यमराज रस्ता भूल जायेगा

किसको ले जाना है समझ न पायेगा 

इस तरह से तुम यम से भी

लड़ जावोगे 

अगर जाना भी पड़ा हंसते गाते 

मस्ती में जानोगे ।

गौरी शर्मा आंशु 

धमतरी छ ग

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