विषय अरावली

विषय – अरावली
अरावली की गाथा जानो ।
आडावाला भी पहचानो ।।
उच्च शिखर सब कहें सिरोही ।
पर्वतमाला लगती मोही ।।
गिरि गुजरात शुरू हो जाती ।
ज्यादा राजस्थान समाती ।।
हरियाणा से दिल्ली आती ।
दुनिया नग प्राचीन बताती ।।
अरावली में राणा आए ।
तब प्रताप सेना गढ़ पाए ।।
युद्ध किया मुगलों से भारी ।
विजय कथाएंँ लिख दी न्यारी ।।
शैल रायसीना कहलाया ।
भवन राष्ट्रपति का बनवाया ।।
हरे-भरे जंगल हैं प्यारे ।
विटप प्रदूषण रोके सारे ।।
संरचना भौगोलिक ऐसी ।
खनिज भरी झोली हो जैसी ।।
जस्ता शीशा तांबा मिलता ।
प्रचुर संगमरमर भी दिखता।।
थार रोक यह हरदम करती ।
भूजल नदियांँ इसमें बहती ।।
गर्मी सूखा हमें बचाए ।
जीवन में खुशहाली लाए ।।
जन्म साबरमती नद जानो ।
स्थल बनास लूनी का मानो ।।
वन्य जीव औषधि अरु मोती ।
जैव विविधता इनमें होती ।।
दिन पर दिन ये घटते जाएंँ ।
संकट मानव पर फिर आएंँ।।
खनन रोकना जिम्मेदारी ।
वरना दुष्प्रभाव हो भारी ।।
मिलकर सारे मुहिम चलाओ ।
अरावली को आज बचाओ ।।
पूर्ण हुई ये मेरु कहानी ।
निज शब्दों में ‘दीप्त’ बखानी ।।
स्वरचित – सुशीला फरमानिया ‘दीप्त’
संबलपुर, ओडिशा



