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भू माफिया ने जानवरों के पानी का सहारा निगल लिया, 20 एकड़ शासकीय भूमि पर कब्जे का खुलासा

भू माफिया ने जानवरों के पानी का सहारा निगल लिया, 20 एकड़ शासकीय भूमि पर कब्जे का खुलासा

 

कटनी। तहसील बड़वारा के ग्राम अमाडी में भूमि माफियाओं द्वारा शासकीय और सार्वजनिक भूमि पर बड़े पैमाने पर अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी द्वारा विगत दिनों चलाए गए आंदोलन के दौरान कई गंभीर तथ्य उजागर हुए हैं।

आरोप है कि कब्जेधारी भू-माफिया मनु नारला द्वारा गांव के रास्ते को बंद कर आम नागरिकों का जीवन दूभर कर दिया गया था। विभिन्न शिकायतों के बाद प्रशासन द्वारा रास्ता खुलवाया गया और कुछ भूमियों की माप कराई गई। माप के दौरान यह सामने आया कि जंगली एवं पालतू जानवरों के पीने के लिए बने तालाब को निजी भूमि बताकर तारबंदी कर उस पर अवैध कब्जा किया गया था।

जांच में यह भी पाया गया कि लगभग 20 एकड़ शासकीय भूमि पर कब्जा किया गया है। इतना ही नहीं, आगे और भूमि कब्जाने की नीयत से करीब 235 गड्ढे खोदे गए थे, हालांकि आंदोलन और शिकायतों के चलते कब्जेधारी फिलहाल पीछे हट गया है।

सिंचाई विभाग की भूमि पर लगभग 92 यूकेलिप्टस के पेड़ लगाए जाने तथा कुछ शासकीय भूमि पर खेती किए जाने की भी पुष्टि हुई है। गांव के कोटवार-चौकीदार की भूमि पर भी अवैध कब्जा पाया गया है। कई शासकीय भूमियों पर मकान, बोरवेल और बांस तक लगाए जा चुके हैं।

पार्टी का आरोप है कि इन भू-माफियाओं को राजस्व विभाग के कुछ जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों का संरक्षण प्राप्त है। हल्का पटवारी द्वारा निष्पक्ष जानकारी उच्च अधिकारियों को नहीं दी गई। आरोप है कि पटवारी को बीसों एकड़ भूमि पर कब्जे की जानकारी होने के बावजूद आज तक प्रशासन को अवगत नहीं कराया गया और मौका पंचनामा में तथ्यों को छिपाया गया।

लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी ने मांग की है कि कब्जेधारी भू-माफिया के साथ-साथ भ्रष्ट कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ भी वैधानिक कार्रवाई की जाए। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि अब आंदोलन सिर्फ माफियाओं के खिलाफ ही नहीं, बल्कि उन्हें संरक्षण देने वाले अधिकारियों के विरुद्ध भी किया जाएगा।

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