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यदि तुम समय को बलवान समझते हो

 

यदि तुम समय को बलवान समझते हो,
तो स्वयं को कमजोर ना समझो।
उठो युवाओ, समय पुकारे,
विवेकानंद का स्वर निहारे।

बल है तुममें, शक्ति अपार,
बस आत्मविश्वास को दो आकार।
हर युवती लक्ष्मीबाई बने,
हर युवा विवेकानंद सजे।

डर को त्यागो, सत्य को थामो,
राष्ट्र-निर्माण में कदम बढ़ाओ।
सोच ऊँची, लक्ष्य महान,
कर्मठ जीवन, दृढ़ संधान।

तन भी सबल, मन भी प्रखर,
यही संदेश दिया बार-बार।
भारत माता के लाल महान,
युवाओं में भर गए स्वाभिमान।

ऐसे युगद्रष्टा को नमन अपार,
युवा दिवस पर शत-शत बार।

रचनाकार ज्योती वर्णवाल
मेरी स्वरचित रचना
नवादा(बिहार)

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