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शासकीय तिलक महाविद्यालय में राष्ट्रीय मतदाता दिवस, सरस्वती पूजा महोत्सव, महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ जयंती तथा नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित

शासकीय तिलक महाविद्यालय में राष्ट्रीय मतदाता दिवस, सरस्वती पूजा महोत्सव, महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ जयंती तथा नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित

 

कटनी – शासकीय तिलक स्‍नातकोत्तर महाविद्यालय में शुक्रवार को राष्ट्रीय मतदाता दिवस, सरस्वती पूजा महोत्सव, महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ जयंती तथा नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती के अवसर पर संयुक्त रूप से एक भव्य शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

 

कार्यक्रम की शुरुआत सर्वप्रथम राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर मतदाता शपथ के साथ की गई। इस शपथ के माध्यम से उपस्थित शिक्षकगण, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राओं ने लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति निष्ठा, निष्पक्ष मतदान तथा जिम्मेदार नागरिक बनने का संकल्प लिया।

 

          शपथ ग्रहण के पश्चात कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा पूजन एवं दीप प्रज्‍ज्वलन के साथ हुआ। इसके उपरांत सरस्वती वंदना पर आधारित नृत्य एवं गायन प्रस्तुत किया गया। महाकवि निराला द्वारा रचित “वर दे वीणावादनी” का भावपूर्ण गायन हुआ, जिससे सभागार आध्यात्मिक एवं साहित्यिक वातावरण से भर गया। इसके पश्चात नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जीवन एवं कर्म पर आधारित एक वृत्तचित्र का प्रदर्शन किया गया।

 

          कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सुनील कुमार वाजपेई ने अपने वक्तव्य में कहा कि “मतदाता शपथ हमें लोकतंत्र की मजबूती का अहसास कराती है। मां सरस्वती ज्ञान और विवेक की अधिष्ठात्री हैं, निराला का साहित्य सामाजिक चेतना का स्वर है और नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जीवन राष्ट्र के लिए त्याग और संघर्ष की प्रेरणा देता है। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।”

 

          इसके उपरांत महाविद्यालय की दिव्यांग छात्रा शिवानी पटेल ने आकर्षक नृत्य प्रस्तुति देकर सभी को भावविभोर कर दिया। इसके बाद हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. माधुरी गर्ग ने निराला के साहित्य और कविता पर आधारित व्याख्यान प्रस्तुत करते हुए उनकी रचनात्मकता और जीवन की मौलिक शक्ति को रेखांकित किया।

 

          हिंदी विभाग के डॉ. विजय कुमार ने अपने उद्बोधन में निराला के गद्य को “जीवन-संग्राम की भाषा” बताते हुए कुल्लीभाट, बिल्लेसुर बकरिहा, अप्सरा, निरुपमा आदि रचनाओं के माध्यम से उनके गद्य में निहित स्वाधीनता चेतना को व्याख्यायित किया।

 

कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रतिमा त्रिपाठी ने किया। उन्होंने संचालन के दौरान सरस्वती पूजा के सांस्कृतिक महत्व और निराला से उसके संबंध पर सारगर्भित विचार रखे। हिंदी विभाग के प्राध्यापक डॉ. अतुल कुमार ने निराला की कालजयी कविता “तोड़ती पत्थर” का सशक्त गायन प्रस्तुत किया।

 

कार्यक्रम में महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं सोमा, दीपशकिजा, राजा, दीपक सहित अन्य विद्यार्थियों ने काव्य पाठ कर कार्यक्रम को साहित्यिक गरिमा प्रदान की।

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