साहित्य रचना
विषय- सौक को जिंदा रखें जीवन में खुशिया भरें

विषय- सौक को जिंदा रखें जीवन में खुशिया भरें
नूतन संकल्प
सौक को जिंदा रखें
नव प्रभात में होगी पूरी
जीवन में खुशिया भरें
बीते वर्ष की हो उम्मीदें पूरी
उम्मीदें बीते वर्ष की,
नव वर्ष में होगी पूरी;
नव प्रवाह बहाकर,
नव वर्ष में करना हर्ष!
है अगर नूतन मन!
फिर होता न जीर्ण तन!
कीर्ति रहे सदा प्रसिद्ध,
युक्ति-प्रमाण से करो सिद्ध।
रहे न बैरी कोई,
करें शुरू आत नई…!
हृदय में हो उमंग यही!
नए सपने हो और हो उमंग नई।
कर्तव्य पथ है बेहतर….
लक्ष्यहीन, निरुद्देश्य जीवन से,
समझो आदर्श कर्तव्यों का
संघर्ष में भी हर्ष मिलता
जीवन है संग्राम,
करना नहीं विश्राम!
सुख- दुःख के हम साथी,
बढ़ेगी जीवन में ख्याति;
बढ़े अपनों से दूरी;
ऐसी हो न कोई मजबूरी,
उम्मीदें बीते वर्ष की,
नव वर्ष में होगी पूरी।
कविता झा
नवी मुम्बई




