नवरात्रि और संस्कृति

नवरात्रि और संस्कृति :
यह केवल पर्व नहीं है,यह भारत की आत्मा का उत्सव है।यह नवरात्रि है—जहाँ संस्कृति स्वयं आरती बनकर जलती है।
जब दीपों की पंक्तियाँ सजती हैं,और मन में आस्था जागती है,तब लगता है मानोहमारी संस्कृति फिर से मुस्कुराती है।
माँ दुर्गा के नौ रूपों मेंजीवन के नौ संदेश छिपे हैं—संयम, साहस, करुणा और शक्ति,जो हमें सही राह दिखाते हैं।
गरबा की हर थाप मेंसिर्फ संगीत नहीं होता,उसमें हमारी परंपराएँ,हमारे संस्कार भी धड़कते हैं।
नवरात्रि हमें सिखाती है—अंधकार कितना भी गहरा हो,एक छोटा सा दीपपूरा जीवन रोशन कर सकता है।
यह संस्कृति हमें जोड़ती है,भाषा और भेद से ऊपर उठाकर,एकता और प्रेम कासंदेश सिखाती है।
आओ इस नवरात्रि हम प्रण करें—केवल पर्व न मनाएँ,बल्कि अपनी संस्कृति कोअपने जीवन में अपनाएँ।
नवरात्रि केवल नौ रातें नहीं,यह हमारी पहचान है—यह हमारी संस्कृति कीअमर उड़ान है।
जय माता दी
नाम— मोनालिसा पोद्दार
काव्य गोष्ठी के लिए




